Thursday, April 1, 2010

शहर का ट्रैफिक...


वैधानिक चेतावनी : हाथ में कानून लेना व्यक्ति और समाज दोनों के लिए हानिकारक है।

पहला सीन : एक आदमी एक ऑटो वाले को पूरे जोर से पकड़कर नीचे खींच रहा है। बीच बीच में लात और घूंसे से उसे यथा शक्ति पीट भी रहा है। उसकी कार सड़क के बीचों बीच खड़ी है। उसके ठीक पीछे
ऑटो लगा है। [कुछ ही देर पहले ऑटोवाले ने कार वाले को पीछे से ठोक दिया है।] पीछे से बस वाला हॉर्न बजा रहा है। बस का क्लीनर और कंडक्टर जो अक्सर लोगों से बदतमीजी से बात करते हैं, पास पहुंच कर ऑटोवाले को पिटते देख रहा है। लेकिन कोई और कुछ नहीं कर रहा।

दूसरा सीन : अब ट्रैफिक पुलिस का सिपाही एक अन्य ऑटोवाले को पीट रहा है। तभी आस पास ठहरे हुए ऑटो वालों में अचानक भगदड़ मच जाती है।

तीसरा सीन : एक ट्रक से एक क्लीनर उतरता है। और ठीक सामने से यू टर्न ले रहे एक ऑटोवाले को पीटने लगता है। उसके हाथ में नीले रंग का एक पॉलिथीन का बैग है। यही पिटाई का हथियार है।

ये तीनों ही घटनाएं एक दो मिनट के अंतराल की हैं। जगह है नोएडा के मॉडल टाउन पुलिस चौकी के ठीक सामने की सड़क। एनएच-24 से मात्र 10 सेकंड नीचे की ओर। वक्त : 11.30 बजे दिन।
अगर आपने गौर किया हो तो अमूमन ऐसा नहीं होता। एक ऑटोवाला पिट रहा हो और बाकी तमाशा देखते रहें। आस पास के सभी जुट जाते हैं और घेर लेते हैं। लेकिन आज ऐसा नहीं हो रहा था। सब के सब या तो दूर से देख रहे थे या फिर भाग रहे थे। देखनेवालों में पुलिस चौकी पर तैनात पुलिसवाले भी थे। आने जाने वाले भी देख रहे थे।
इनमें साफ तौर पर उस वक्त गलती उसी ऑटोवाले की थी, जिसने कारवाले को ठोक दिया था। जिसको पुलिस वाले ने पीटा वो इसलिए कि उस वक्त सड़क से गुजरते हुए पहले वही मिल गया। तीसरा क्यों पिटा ये उसको भी समझ में नहीं आया होगा। क्योंकि वो तो सामने से आया और यू टर्न ले रहा था।
एनएच 24 से नोएडा में घुसते ही पटरी के पास ऑटो वाले खड़े रहते हैं। जिन्हें गाजियाबाद से नोएडा जाना होता है उनके लिए यह सुविधा जनक होता है। फिर भी यह बिल्कुल गलत है। इससे ट्रैफिक जाम होता है और एनएच 24 से उतर कर नोएडा जाने वाली गाड़ियों से एक्सीडेंट का भी खतरा रहता है।

नोएडा में आने जाने वालों के लिए जितने साधन हैं, उतनी ही फजीहत है। ज्यादातर इलाकों में छोटी दुरियों के लिए साइकिल रिक्शा चलते हैं। मुख्य सड़कों पर पब्लिक ट्रांसपोर्ट के रूप में ऑटो रिक्शा और बसे हैं। और अब तो नोएडा में मेट्रो सेवा भी उपलब्ध है।

नोएडा 'गोल चक्कर' से सेक्टर 11 की ओर आने वाली सड़क पर रिक्शा और ऑटो रिक्शा की मनाही है। इसके लिए कहीं कहीं बोर्ड में लगाए गये हैं। लेकिन ऑटो वाले इस कदर चलते हैं कि बाकियों का चलना बहुत ही मुश्किल होता है। चाहे पैदल या फिर किसी भी गाड़ी से। सभी एज टु एज मिला के चलते हैं। एक या आधे इंच के फासले पर उनका ब्रेक लगता है।
कहने को नोएडा में सिटी बसें भी चलाई गयी हैं। दिन में कहीं न कहीं चलती भी दिखेंगी। जिस मॉडल टाउन पुलिस चौकी का इस घटना में जिक्र है, उसी के ठीक पीछे पीले रंग की कई बसें खड़ी मिल जाएंगी।
लेकिन अगर कोई यह जानना चाहे कि उनमें से कोई बस कब जाएगी? या किसी खास रूट की बस कब जाएगी, कोई बताने वाला नहीं। 
"अभी परसों की बात है। मैंने सेक्टर 11 के लिए बस के बारे में पूछा। कोई कुछ नहीं बोला। जब मैं ऑटो पकड़ने के लिए सड़क पार कर लिया तो देखा, एक बस उधर जा रही है। मजे की बात यह कि जो व्यक्ति ड्राइविंग सीट पर बैठा था उसने पूछने पर ऐसे रिएक्ट किया जैसे शहर में पहली बार आया हो। उसने बस स्टार्ट की और एक दो लोग जो भी चढ़ पाए उन्हें लेकर चल दिया"। यह बात बतायी सुनील नाम के एक सज्जन ने, जो रोजाना साहिबाबाद से नोएडा अप डाउन करते हैं। यही तस्वीर है नोएडा में ट्रैफिक की। गनीमत है ऊपरवाला अच्छा ट्रैफिक कंट्रोलर भी है।
[शेखर, नोएडा में]

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