Monday, May 31, 2010
अर्ज़ है...कभी ख़ुदा की सूरत तो नहीं देखी... मगर तेरे चेहरे में मुझे भगवान नज़र आता है..जब मैंने बोलना शुरु किया था, तो सबसे पहले मेरे मुंह से मां ही तो निकला था..
और तुम कैसे ख़ुशी से चहकी थीं
...
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